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Corona – An Eye Opener

Corona Virus

SCRIPT WRITTEN BY NEERAJ BHATIA

CONTEXT: उसने अपनों के आगे कभी अपनी किसी जरूरत को तवज्जो नहीं दी, उसकी ज़िंदगी उन्ही के लिए थी, वो उन्ही के लिए जिया और उन्ही के लिए मरता भी, लेकिन जब उसको उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी तब उसने पाया कि उन्होंने ही सबसे पहले उसका साथ छोड़ दिया. वो आज भी सोच रहा है कि वो ज़िन्दगी और ज़िन्दगी के मूल्यों को समझने में कहाँ गलत था? जो उसके साथ हुआ वो तिरस्कार था या मजबूरी ?

Casting

Gopal Kishan – Father
Shanti Devi – Mother
Sudhakar – Elder Son
Atul- Younger Son
Archna – Sudhakar’s Wife
Payal – Atul’s Wife
Madhav Rao – Old Age Home Friend

LOCATION:  INT.  OLD AGE HOME DAY
ओल्ड ऐज होम का दृश्य, चारो तरफ चहल पहल है, जिधर देखो सभी किसी न किसी काम में व्यस्त है. बस इस जगह कि ख़ास बात ये है कि ये एक सीनियर सिटीजन के रहने ही जगह है, यहाँ के सभी बाशिंदे या तो रिटायर्ड है, या अपने घर वालों के सताए हुए या खुद ही यहीं आ कर रहना चाहते है और फिर या तो पुलिस वाले किसी सड़क से पकड़ कर ले आते है. लेकिन यहाँ सभी खुश दिखाई दे रहे है. कोई गार्डनिंग कर रहा है, कोई नाश्ता बना रहा है, कोई नाश्ता सर्व कर रहा है, कोई सफाई में लगा हुआ है. कुछ तो मिलकर धोबी घाट खोले हुए हैं और मिलकर कपडे धो रहे है.
गोपाल किशन भी यहाँ अभी थोड़े ही दिन पहले आये हैं. जिस हॉस्पिटल में उनका इलाज़ चल रहा था, वही काम करने वाले एक डॉक्टर दम्पति ने ये ओल्ड ऐज होम खोला हुआ है. उन दोनो को सेवा करने का बहुत शौंक है. कोई भी मजबूर मिल जाता है, वो उसे यही ले आते है और अपनी ड्यूटी समाप्त होने के बाद खुद ही सबकी सेवा करते हैं . जब उन्होंने देखा कि इलाज़ के दौरान उनसे कोई मिलने ही नहीं आया, तो वे उन्हें अपने साथ यहाँ ले आये.

माधव राव
(अखबार का एक पन्ना खोल कर दिखते हुए)
“गोपाल किशन जी, अरे आपने देखा क्या, आज तो आपके फोटो न्यूज़ पेपर में छपी है”

गोपाल किशन
“अच्छा, दिखाओ ज़रा”

गोपाल किशन
(देखने के बाद थोड़ा गंभीर मुद्रा में)
“ये मेरी तस्वीर नहीं है”

माधव राव
(जिद्द से)
“क्या बात कर रहे हो भाई, ये हुबहु आपकी ही तस्वीर है”

माधव राव न्यूज़ पेपर लेकर औरों के पास चला जाता है और उनको भी तस्वीर दिखता है. सभी आश्चर्य से गोपाल किशन कि ओर देखने लगते है,
माधव राव
(कौतुहूल वश सभी अन्य साथियों के साथ)
“गोपाल किशन जी, आप जब सेआए है, बड़े चुप चुप से रहते हैं, आज तो आपको अपने बारे में बताना ही पड़ेगा. बतायेंगे ना”

गोपाल किशन अपनी ही धुन में कही खो जाता है.और उसका मस्तिष्क अतीत के पन्नो को पलटने लगता है

गोपाल किशन (VOICE OVER)
अभी जैसे कल ही की तो बात है, झूमते गाते कट रहे थे वो दिन, और उस दिन तो बड़े बेटे की मैरिज एनिवर्सरी भी थी

LOCATION:  INT. HOME LIVING ROOM DAY
एक खूबसूरत बिल्डिंग और उसमें एक अलीशान दो मंज़िला घर, दिन का समय
आज गोपाल किशन जी के बेटे सुधाकर की मैरिज एनिवर्सरी है सब लोग बहुत खुश हैं बहुत सारे मेहमान आने वाले हैं सभी लोग घर को सजाने में लगे हुए हैं । एक तरफ बच्चे खेल रहे हैं तो कभी-कभी इतना शोर मचा रहे हैं की जोर शोर से बज रहे म्यूजिक प्लेयर की आवाज भी दबी जा रही है तभी अर्चना कमरे में दाखिल होती है

अर्चना
(नौकरों से)
“अरे जल्दी जल्दी हाथ चलाओ अभी बहुत काम बाकी है पूरे घर को सजाना है”

अर्चना आज बहुत खुश दिख रही है गोपाल किशन जी बैंक गए हुए हैं वह भी अपनी पेंशन लेकर आते ही होंगे उसके मन में लड्डू फूट रहे हैं. ₹50000 आज के जमाने में एक अच्छी खासी रकम होती है तभी दरवाजे पर डोर बेल बजी अर्चना लगभग दौड़ती हुई दरवाजे खोलने दौड़ी. सामने गोपाल कृष्ण जी को खड़ा देखकर उसकी बांछें खिल गई

अर्चना
“आइए बाबूजी थक गए होंगे इधर बैठिए. मैं आपके लिए पानी लेकर आती हूं”

गोपाल किशन जी मन ही मन इस प्यार को देखकर प्रफुल्लित हो गए. उन्हें लगता था सुधाकर ने लव मैरिज जरूर की थी. किंतु शायद उनका सोचना गलत था उनका परिवार बहुत सुख और समृद्धि से रह रहा है

अर्चना तब तक पानी लेकर आ गई उसने गोपाल किशन जी को पानी दिया गोपाल कृष्ण जी ने थोड़ा सा पानी पी कर गिलास रख दिया

गोपाल कृष्ण
( जेब से पैसे निकाल कर, अर्चना के हाथ में देते हुए)
“बेटा यह थोड़े से पैसे रख लो, तुम लोग की मैरिज एनिवर्सरी का एक छोटा सा मेरी तरफ से गिफ्ट है”

अर्चना
( लिफाफा पकड़कर मन ही मन खुश होते हुए किंतु दिखावा करते हुए)
“नहीं नहीं बाबूजी, इसकी क्या जरूरत थी लेकिन कोई बात नहीं, यह तो आपका प्यार ही है”

लिफाफे को लेकर अलमारी में रखने चली गई. तभी सुधाकर कमरे में दाखिल हुआ

सुधाकर
(गोपाल कृष्ण जी के पांव छूते हुए)
“अरे बाबूजी आप कब आए?”

दूसरी ओर से अर्चना दाखिल हुई

अर्चना
( जल्दी से पैसे देने की बात को छुपाती हुई)
“बस अभी अभी आए हैं, इनका मन नहीं मान रहा था और फिर आपसे इतना प्यार करते हैं इसीलिए आपसे मिलने चले आए”

सुधाकर
“यह तो बहुत अच्छा किया बाबूजी अब आप शाम तक यही ठहर जाइए आज शाम को एक छोटी सी पार्टी है मैं तो आपको उसके बाद ही जाने दूंगा.”

तब तक शांति देवी कमरे के अंदर दाखिल हुई. शांति देवी गोपाल कृष्ण की पत्नी और सुधाकर की मां थी जो कि वही रहती थी और घर के काम में हाथ बंटाया करती थी

शांति देवी
(गोपाल किशन से मुखातिब होकर)
“अरे आप कब आए मुझे तो किसी ने बताया ही नहीं”

गोपाल किशन
(हंसकर)
“बस अभी अभी आया हूं , जाना चाहता था लेकिन सुधाकर जिद पर अड़ा है क्या शाम की पार्टी अटेंड करने के बाद ही जाऊं इसलिए रुक गया”

तभी किसी बच्चे ने टीवी ऑन कर दिया
और सभी ने अचानक देखा कि टीवी पर एक न्यूज़ आ रही है जिसमें यह बताया जा रहा है कि कोरोना वायरस इस शहर में बहुत तेजी से फैल रहा है और धारा 144 लगा दी गई है किसी भी तरह की असेंबली की इजाज़त नहीं है

गोपाल किशन
(सुधाकर से)
“बेटा यह क्या है अब तो धारा 144 लग गई पार्टी कैसे होगी”

सुधाकर
(हंसते हुए)
“यह सब तो होता ही रहता है बाबूजी करोना की वजह से जिंदगी ठहर थोड़ी जाती है पार्टी तो पहले से ही तय है और वह अपने समय पर ही होगी. आप अभी यही आराम कीजिए”

गोपाल किशन को छोड़ कर सभी लिविंग रूम से निकल गए

LOCATION:  INT HOME PARTYROOM LATE EVENING

शाम हुई और जबरदस्त भीड़ के साथ पार्टी भी हुई किसी तरह का कोई विघ्न नहीं पड़ा प्रशासन के ओर से कोई परेशान करने नहीं आया हर तरह शोर ही शोर था. सब एक दुसरे से ऐसे मिल रहे थे जैसे जन्मों बाद मिले हों
उनका छोटा बेटा अतुल और बहु पायल भी आये थे. गोपाल किशन जी उनसे मिलकर भी बहुत प्रसन्न हुए. उनके बच्चे भी दादा जी दादा जी कहकर उनसे लिपट गए उनका दिल गदगद हो गया

अतुल
(चरणस्पर्श करते हुए)
“आप कब आये, मुझे तो किसी ने बताया नहीं कि आप आये है , नहीं तो मैं जल्दी आ जाता”

पायल
(चरणस्पर्श कर के)
“कैसे है बाबू जी, आप तो घर पर आते ही नहीं, आपकी बहुत याद आती है, बच्चे तो आप को बहुत ही याद करते हैं.”
(अतुल के और ऊँगली कर के )
“इनकी क्या कहूं, दिन भर आप को याद करते रहते है”

गोपाल किशन
“जिनके तुम जैसे प्यार करने वाले बच्चे हो, वो मातापिता कभी बूढ़े नहीं हो सकते, और मैं भी नहीं होऊंगा”
गोपाल किशन जी सहृदय गदगद हो गए, और सभी को खूब आशीर्वाद दिए.

LOCATION:  INT. HOME PARTYROOM NIGHT

पार्टी अपने शबाब पर थी. गाना बजाना चल रहा था, सभी अपनी अपनी मौज़ में मगन थे . तभी शांति देवी वहां आ गई

शांति देवी
“अरे आप यहाँ बैठे है, वहां पार्टी में सब आपका इंतज़ार कर रहे हैं”

गोपाल किशन
“शांति, मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है. लगता है तबियत कुछ बिगड़ सी रही है”

शांति देवी
“दवाइयां तो समय से लेते है न ?”

गोपाल किशन
“हाँ हाँ , वो बात नहीं कुछ बुखार सा लग रहा है , गले में खराश सी लग रही है, मुझे लगता है अब मुझे चलना चाहिए. रात बहुत हो जाएगी तो सवारी भी नहीं मिलेगी.”

शांति देवी
“आप ही कि जिद है, वरना तो सुधाकर भी कितनी बार कहता है कि हमारे साथ ही रहो. लेकिन आप हो कि मानते है नहीं, वही पुश्तैनी मकान में रहोगे, उसे बेच क्यों नहीं देते?”

“ठहरिये, मैं सुधाकर को बुला लाती हूँ , वो बुरा मान जायेगा, फिर मुझे ही खरी खोटी सुनाएगा”

शांति देवी ये कह कर कमरे से बहार निकल जाती हैं

सुधाकर शांति देवी के साथ ही अंदर आता है

सुधाकर
“क्या हुआ बाबू जी?”

गोपाल किशन
“कुछ नहीं, थोड़ी तबियत ठीक नहीं लग रही, घर जा कर आराम करूंगा तो ठीक हो जाऊंगा. अब मुझे जाने दो”

सुधाकर
“नहीं, नहीं, आप कही नहीं जायेंगे, लोग क्या कहेंगे? पहले आप मेरे साथ पार्टी में चलिए सब से मिलिए, सब आप को पूछ रहे हैं उसके बाद आप यही आराम करिये, सुबह चले जाइएगा”

सुधाकर कि जिद के आगे गोपाल किशन जी कुछ नहीं बोले और उसके साथ पार्टी रूम में चले गए.

LOCATION:  INT HOME LIVINGROOM NIGHT

जैसे-जैसे रात गहराने लगी गोपाल कृष्ण जी की तबीयत और खराब होने लगी, उनको थकन सी महसूस जाने लगी तो, वो पार्टी रूम से वापिस लिविंग रूम में आकरसोफे पर लेट गए. शांति देवी को जैसे ही पता लगा तो उन्होंने सुधाकर को खबर दी

पार्टी में सुधाकर के दोस्त भी आए हुए थे जो कि पेशे से डॉक्टर थे जब उनको खबर हुई तो उन्होंने गोपाल किशन जी का चेकअप किया और उनको आराम करने की सलाह दी

सुधाकर से अकेले में उन्होंने कुछ यूँ समझाया

डॉक्टर
(गंभीरता से)
“सुधाकर साहब बुरा मत मानिए अगर लेकिन मुझे कुछ हद तक कोरोना के लक्षण नजर आ रहे हैं”

सुधाकर
(कौतहूल स्वर में)
“डॉक्टर साहब आखिर ये कोरोना है क्या बला ?”

डॉक्टर
“देखिये सुधाकर साहब मैं आप को अँधेरे में नहीं रखूँगा ये एक महामारी है जिसकी चपेट में कोई भी आ सकता है मैं भी,आप भी परिवार भी और ये सारा मोहल्ला या शहर भी. ये छूने से फैलती है. मैं आपको कुछ मास्क दे रहा हूँ . एहतियातन सभी को चेहरे पर पहना दीजियेगा.”

सुधाकर यह बात सुनकर सकते में आ गया अब वह चाहता था कि गोपाल किशन जी उसके घर से चले जाएं किंतु वह स्वयं ही रोक चुका था तो उसकी समझ में नहीं आया कि उन्हें किस कमरे में आराम करने के लिए जगह दे क्योंकि कोरोना एक महामारी है इस बात को जानता था और मैं यह भी जानता था यदि वह यहां रहे यह बीमारी सबको लग जाएगी

उसने अर्चना से इस बात का जिक्र किया तो उसने उसे एक आईडिया दिया. जहां पर उसका पालतू कुत्ता बंधा हुआ था वहीं पास में उसने उनका बिस्तर लगा दिया और उनको वही आराम करने के लिए कहा जाये

सुधाकर के दोस्त डॉक्टर ने यह बात सभी को बता दी और अब सभी के चेहरे पर खौफ साफ नजर आने लगा था
अचानक ही पार्टी बेरंग हो गई थी. सभी आपस में बात करने लगे, कि अभी तो गोपाल किशन जी उनके साथ थे, कहीं उनको वास्तव में कोरोना हुआ तो उन सभी को उसका असर हो सकता है. यह सोच कर सभी बारी बारी से पार्टी छोड़ कर जाने लगे

पार्टी समाप्त हो गई थी परिवार के सदस्यों के चेहरों पर भी खौफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहा था ।

LOCATION:  EXT. HOME OUTSIDE MARSHAL ROOM NIGHT

गोपाल किशन जी की चारपाई घर के एक बाहरी कमरे में डाल दी गयी जिसमें इनके पालतू कुत्ते मार्शल का बसेरा है । गोपाल किशन जी कुछ साल पहले एक छोटा सा घायल पिल्ला सड़क से उठाकर लाये थे और अपने बच्चे की तरह पालकर इसको नाम दिया मार्शल ।

मार्शल ने उन्हें देखा तो जोर जोर से पूँछ हिलने लगा , जोर जोर से भोंकने लगा. गोपाल किशन जी ही उसे देखकर भावुक हो गए और उसे प्यार करने लगे

इस कमरे में अब गोपाल किशन जी , उनकी चारपाई और उनका प्यारा मार्शल हैं । दोनों बेटे और बहू ने दूरी बना ली और बच्चों को भी पास ना जानें के निर्देश दे दिए गये ।

सरकार द्वारा जारी किये गये नंबर पर फोन करके सूचना दे दी गयी । खबर मुहल्ले भर में फैल चुकी थी लेकिन मिलने कोई नहीं आया ।

साड़ी के पल्ले से मुँह लपेटे हुए, हाथ में छड़ी लिये पड़ोस की कोई एक बूढी अम्मा आई और गोपाल किशन जी की पत्नी से बोली

बूढ़ी अम्मा
“अरे कोई इसके पास दूर से खाना भी सरका दो , वे अस्पताल वाले तो इसे भूखे को ही ले जाएँगे उठा के” ।

शांति देवी
(चिंता भरे स्वर में)
“हाँ इन्होने तो कुछ खाया भी नहीं है”

अर्चना
(जल्दी से दौड़कर)
“मैं ले कर आती हूँ”

गोपाल किशन जी की आँखों मं दोनों के लिए भरपूर प्यार आ गया.
मन ही मन सोचने लगे
(बुदबुदाते हुए)
“बीमारी में भला कौन देखभाल करता है और देखो मेरा तो पूरा परिवार ही मेरी चिंता कर रहा है”

खाना तो आ गया लेकिन अब प्रश्न ये था कि उनको खाना देनें के लिये कौन जाए ।

अर्चना
“खाना तो मैं ही दे देती मुझे कोई गुरेज थोड़ा ही है लेकिन सोचती हूँ मुझे कुछ हो गया तो मेरे तो छोटे छोटे बच्चे हैं.”

पायल
“ये ही मैं भी सोच रही थी. मुझे कुछ हो न जाये बेचारे बच्चे कहाँ जायेंगे वार्ना तो मैं ही दे देती”

बहु ने खाना अपनी सास को पकड़ा दिया
अब गोपाल किशन जी की पत्नी के हाथ, थाली पकड़ते ही काँपने लगे , पैर मानो खूँटे से बाँध दिये गए हों ।

इतना देखकर वह पड़ोसन बूढ़ी अम्मा को गुस्सा आ गया

बूढ़ी अम्मा
“अरी तेरा तो पति है तू भी ……..।”
“मुँह बाँध के चली जा और दूर से थाली सरका दे वो अपने आप उठाकर खा लेगा” ।

शांति देवी
(चिढ़ कर)
“अरे यदि मुझे कुछ हो गया तो मेरे तो आगे पीछे कोई नहीं है , क्या अर्चना क्या पायल इन दोनों में से कोई मेरी सेवा नहीं करने वाला , यूँ ही मरने के लिए छोड़ देंगी”

दोनों बहुओं से मुँह बनाया और पल्लू झटक कर चली गई, और जाते जाते अपने पतियों को भी हाथ पकड़ कर ले गई, जो थोड़ी दूर से खड़े होकर सारी बात सुन रहे थे

सारा वार्तालाप गोपाल किशन जी चुपचाप सुन रहे थे ,
गोपाल किशन जी ने मन ही मन बड़बड़ाते हुए

गोपाल किशन
“वक्त से साथ कैसे इंसान का व्यवहार बदल जाता है. एक बार तो मन में आया कि चलो बहुएं तो पराये घर कि है, किन्तु ये तो मेरे अपने भी अजीब सा बर्ताव कर रहे है. क्या अभी थोड़ी देर पहले मैं अछूत नहीं था, अब अचानक मैं इनके छूने के काबिल भी न रहा”

(उनकी आँखें नम थी और काँपते होठों से )
“कोई मेरे पास ना आये तो बेहतर है , मुझे भूख भी नहीं है” ।

LOCATION:  EXT/INT HOME OUTSIDE STREET NIGHT

तभी एम्बुलेंस और पुलिस का सायरन बजा, सभी मोहल्ले वाले इकट्ठे हो गए. उन्होंने एड्रेस पुछा और सुधाकर के घर पर पहुंच गए

पुलिस अफसर
(सुधाकर से)
“आपको पता नहीं है कि धारा १४४ लागू हो चुकी है और अब किसी भी तरह कि असेंबली या पार्टी करना मना है”

सुधाकर
(गिड़गिड़ाते हुए)
“बस सर छोटी सी पार्टी थी, अब तो पार्टी ख़त्म हो चुकी है”

एंबुलेंस डॉक्टर
“पेशेंट कहाँ है ?”

सुधाकर
“आइये, यहाँ पर है”

एंबुलेंस डॉक्टर
“ये भी पार्टी में शामिल थे?”

सुधाकर
(सफ़ेद झूठ बोलते हुए)
“नहीं नहीं ये तो अभी आये है, और जब से आये है, यही पर बैठे है, कही गए भी नहीं”

एंबुलेंस डॉक्टर
(गोपाल किशन जी को चेकअप करते हुए)
“क्या नाम है आपका?”

सुधाकर
(उनके बोलने से पहले ही)

“गोपाल किशन, मेरे पिता जी है”

गोपाल किशन जी को एम्बुलेंस में बैठने के लिये बोला जाता है । गोपाल किशन जी घर के दरवाजे पर आकर एक बार पलटकर घर की तरफ देखते हैं । पोती -पोते फर्स्ट फ्लोर की खिड़की से मास्क लगाए दादा को निहारते हुए और उन बच्चों के पीछे सर पर पल्लू रखे उनकी दोनों बहुएँ दिखाई पड़ती हैं । ग्राउंड फ्लोर पर दोनों बेटे काफी दूर, अपनी माँ के साथ खड़े थे । विचारों का तूफान गोपाल किशन जी के अंदर उमड़ रहा था ।

सभी बच्चे
(गोपाल किशन जी को एम्बुलेंस के तरफ जाते देख कर)
“दादा जी कहाँ जा रहे हैं?”

बहुएं
(बच्चों से )
“दादा जी को बाई बाई कर दो”

सभी बच्चे
“क्या अब दादा जी नहीं आएंगे?”

गोपाल किशन जी ने देखा उनकी पोती उनकी तरफ बाई का इशारा करती हुई हाथ हिला रही थी एक क्षण को उन्हें लगा कि ‘जिंदगी ने अलविदा कह दिया’ । गोपाल किशन जी की आँखें लबलबा उठी । उन्होंने बैठकर अपने घर की देहरी को चूमा और एम्बुलेंस में जाकर बैठ गये ।

एम्बुलेंस चल पड़ी. गोपाल किशन जी ने एम्बुलेंस की पिछली खिड़की से देखा, की जिस देहरी को वह चूम कर बैठे थे, उनकी पत्नी शांति देवी ने तुरंत ही बाल्टी भर पानी डाल कर धो दिया था . उनको लगा कि उनका दिल जैसे हलक में आ गया हो

उन्होंने देखा मार्शल उसी एम्बुलेंस के पीछे – पीछे हो लिया जो गोपाल किशन जी को अस्पताल लेकर जा रही थी ।

LOCATION:  INT. OLD AGE HOME DAY

माधव राव
“तो फिर हॉस्पिटल में आने के बाद क्या हुआ? क्या आप वास्तव में महामारी से प्रभावित थे? कितने दिन इलाज़ चला ?”

गोपाल किशन
“हॉस्पिटल पहुंचने के बाद मेरी टेस्टिंग की गई. सामान्य सा बुखार था, मेरे सभी टेस्ट नेगेटिव आये. उन्होंने मुझे बधाई दी. कुछ दिन ऑब्जरवेशन में रखा और फिर छुट्टी दे दी”

माधव राव
“तो क्या आपके घर से आपकी कोई खबर लेने नहीं आया? अरे आप डॉक्टर्स को बता देते, तो वो खबर कर देते, कोई ना कोई आपको लेने आ जाता”

गोपाल किशन
“उन्होंने तो बहुत बार कहा, लेकिन मैंने ही मना कर दिया. जिन लोगों ने मुझे जीते जी ही मार दिया , वो सब अब तो सब मेरे लिए मर चुके है.
जब मैं हॉस्पिटल से बाहर निकला तो बस मेरा मार्शल ही मेरा इंतज़ार कर रहा था, इसीलिए उसी के साथ मैं यहाँ आ गया. जुबान वालों से बेहतर तो ये बेज़ुबान ही सही. कम से कम प्यार तो दिल से और सच्चा करता है”

माधव राव
“तो ये जो आपकी फोटो न्यूज़ पेपर में छपी है मिसिंग कॉलम में, और साथ है ये भी लिखा है क़ि आप का पता बताने वाले को 50 हजार रुपया का इनाम दिया जायेगा”

गोपाल किशन
(हँसते हुए)
“50 हजार – हाँ पढ़कर ध्यान आया कि इतनी ही तो मासिक पेंशन आती थी मेरी , जिसको मैं परिवार के ऊपर हँसते गाते उड़ा दिया करता था।

तभी किसी ने टीवी ऑन कर दिया. रोज़मर्रा क़ि तरह सभी न्यूज़ सुनने लगे. गोपाल किशन जी को आज न्यूज़ भी कुछ अच्छी लग रही थी, आज न्यूज़ में भी एंकर बता रहा था क़ि किस तरह से लॉक डाउन क़ि वजह से नदियां स्वच्छ हो गई है, प्रदूषण लगभग ख़त्म सा हो गया है, मौसम सुहाना हो गया है , हवा साफ़ हो गई है और तो और ओजोन लेयर ने भी अपने आप को रिकवर कर लिया है. आज उन्हें भी अपने घावों पर मरहम लगने का एहसास हो रहा था शायद अपना दुःख सभी के साथ बाँट कर अच्छा लग रहा था. आज अपने बेगाने हो गए थे लेकिन बेगाने अपने हो गए थे
THE END